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वैदिक गणित

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आधुनिक समय में वैदिक गणित के उद्धारक एवं जिनके शिष्यो के कारण  विश्व को कंप्यूटर और बाइनरी प्राप्त हुई ऐसे जगतगुरु शंकराचार्य एव महान गणितज्ञ श्री भारती कृष्ण तीर्थ जी के निर्वाण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। स्वामी भारती कृष्णतीर्थ जी महाराज (गोवर्धन पीठ, पुरी के 143 वें शंकराचार्य) का जन्म 14 मार्च 1884 (चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में तृतीय तिथि विक्रम संवत १८२६) को हुआ था।  तिरुन्निवल्ली में डिप्टी कलेक्टर पी. नृसिंह शास्त्री के पुत्र के रूप में जन्में वेंकटरमण (बचपन में वेंकटरमण नाम से प्रसिद्ध थे ) जन्मजात असाधारण प्रतिभा के स्वामी थे। । आप अत्यंत विलक्षण प्रतिभाशाली छात्र जो कि हमेशा प्रत्येक कक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करते रहे। आप संस्कृत भाषा में भी इतनी गूढ़ पकड़ रखते थे कि मद्रास संस्कृत संगठन ने जुलाई, 1899 ई. में आपको "सरस्वती" सम्मान दिया गया। आपने  सन्‌ 1904 में एक साथ सात विषयों में एम.ए. किया। साहित्य, भूगोल, इतिहास, संगीत, गणित, ज्योतिष जैसे विषयों में उनकी गहरी पैठ थी. शास्त्रोक्त अष्टादश विद्याओं के ज्ञाता, अनेक भाषाओं के प्रकांड पंडित तथा दर्शन क...
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आधुनिक समय में वैदिक गणित के उद्धारक एवं जिनके शिष्यो के कारण  विश्व को कंप्यूटर और बाइनरी प्राप्त हुई ऐसे जगतगुरु शंकराचार्य एव महान गणितज्ञ श्री भारती कृष्ण तीर्थ जी के निर्वाण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। स्वामी भारती कृष्णतीर्थ जी महाराज (गोवर्धन पीठ, पुरी के 143 वें शंकराचार्य) का जन्म 14 मार्च 1884 (चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में तृतीय तिथि विक्रम संवत १८२६) को हुआ था।  तिरुन्निवल्ली में डिप्टी कलेक्टर पी. नृसिंह शास्त्री के पुत्र के रूप में जन्में वेंकटरमण (बचपन में वेंकटरमण नाम से प्रसिद्ध थे ) जन्मजात असाधारण प्रतिभा के स्वामी थे। । आप अत्यंत विलक्षण प्रतिभाशाली छात्र जो कि हमेशा प्रत्येक कक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करते रहे। आप संस्कृत भाषा में भी इतनी गूढ़ पकड़ रखते थे कि मद्रास संस्कृत संगठन ने जुलाई, 1899 ई. में आपको "सरस्वती" सम्मान दिया गया। आपने  सन्‌ 1904 में एक साथ सात विषयों में एम.ए. किया। साहित्य, भूगोल, इतिहास, संगीत, गणित, ज्योतिष जैसे विषयों में उनकी गहरी पैठ थी. शास्त्रोक्त अष्टादश विद्याओं के ज्ञाता, अनेक भाषाओं के प्रकांड पंडित तथा दर्शन क...