Posts

Showing posts from December, 2016

रसायन शास्त्र

रसायन शास्त्र रसायनशास्त्र विज्ञान की वह शाखा है जिसमें पदार्थों के संघटन, संरचना, गुणों और रासायनिक प्रतिक्रिया के दौरान इनमें हुए परिवर्तनों[1] का अध्ययन किया जाता है। इसका शाब्दिक विन्यास रस+अयन है जिसका शाब्दिक अर्थ रसों (द्रवों) का अध्ययन है। यह एक भौतिक विज्ञान है जिसमें पदार्थों के परमाणुओं, अणुओं, क्रिस्टलों (रवों) और रासायनिक प्रक्रिया के दौरान मुक्त हुए या प्रयुक्त हुए ऊर्जाका अध्ययन किया जाता है। संक्षेप में रसायन विज्ञान रासायनिक पदार्थों[2] का वैज्ञानिक अध्ययन है। पदार्थों का संघटन परमाणु या उप-परमाण्विक कणों जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन[3] से हुआ है। रसायन विज्ञान को केंद्रीय विज्ञान या आधारभूत विज्ञान भी कहा जाता है क्योंकि यह दूसरे विज्ञानों जैसे, खगोलविज्ञान, भौतिकी, पदार्थ विज्ञान, जीवविज्ञान और भूविज्ञान को जोड़ता है।[4][5] दस सर्वाधित प्रयुक्त रसायन रासायनिक पदार्थउत्पादों की संख्यामात्रा (टनों में)पानी26,5092,355,650टाइटेनियम डाईआक्साइड4,46361,790जाइलीन (Xylene)4,27128,5682-Methyl-4-isothiazolin-3-one2,95339आइसोप्रोपेनॉल2,88118,116ब्यूटिल एसीटेट2...

आधुनिक भारत की मैलिक वैज्ञानिक परम्परा

आधुनिक भारत की मौलिक वैज्ञानिक परंपरा इस परंपरा के अंतर्गत उन वैज्ञानिक खोजों को रखा जा सकता है, जो भारत में जन्मे और भारत में ही रहकर, यहीं के संसाधनों से यहीं वैज्ञानिक खोजें कीं और दुनिया के सामने मिसाल कायम की। वैसे तो अंग्रेजों के आने के बाद ज़्यादातर वैज्ञानिक खोज अंग्रेजों के द्वारा ही की गई, किंतु उनके साथ-साथ भारतीय वैज्ञानिकों ने भी अनेक प्रयोग किए और उपलब्धियाँ हासिल कीं। 14 नवम्बर 1941 को केंद्रीय एसेम्बली में पारित प्रस्ताव सी. एस. आई. आर. की स्थापना इस दिशा में पहला कदम था। फिर 26 सितंबर 1942 को सर ए. रामास्वामी मुदालियर और डॉ॰शांतिस्वरूप भटनागर के प्रयासों के फलस्वरूपवैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (कौंसिल ऑफ साइंटिफिक एण्ड इंडस्ट्रियल रिसर्च / सी. एस. आई. आर.) यानीकी स्थापना, नई दिल्ली में एक स्वायत्त संस्था के रूप में हुई। हालाँकि इसकी नींव अंग्रेजों के कार्यकाल में ही पड़ गई थी परंतु काम-काज के सारे नियंत्रण अंग्रेजों के पास होने के कारण विकास कार्य नगण्य ही था। इसलिए हमारा देश लगभग हर वस्तु, सुई, टूथपेस्ट जैसी रोज़मर्रा की आवश्यक वस्तुओं के लिए भी दूसरे देश...