भूकम्प एवं वैदिक ज्योतिष - एक समीक्षा
भूकम्प एवं वैदिक ज्योतिष - एक समीक्षा... वैदिक ज्योतिष के प्राचीन संहिताकारोंने अपने ग्रन्थोंमें 'मेदिनी ज्योतिष' से सम्बन्धित विषयोंपर अनेकानेक सूत्र एवं सिद्धान्तोंका सारगर्भित विवेचन किया है। इन ऋषि- मनीषियोंमें गर्ग, नारद एवं #वराहमिहिर ने अपनी संहिताओं क्रमशः #गर्गसंहिता, नारदीय संहिता एवं बृहत्संहिता में #भूकम्प के परिप्रेक्ष्यमें निम्न महत्त्वपूर्ण विषयोंपर विस्तृत विवेचन किया है- (१) नक्षत्रमण्डल, (२) दिग्दाह-लक्षण, (३) उल्का लक्षण एवं (४) परिवेष लक्षण। आचार्य गर्गकी संहितामें वर्णित तिथियोंका भूकम्पसे निश्चित सम्बन्ध वैज्ञानिक शोधमें सटीक एवं महत्त्वपूर्ण पूर्वसूचकके रूपमें प्रतिस्थापित हुआ है। प्राकृतिक आपदाओंमें सबसे भयावह एवं व्यापक क्षतिकारक है भूकम्पकी त्रासदी । भारतवर्षमें सम्भावित भूकम्पक्षेत्रके रूपमें एक बड़ा भाग पूर्वनिश्चित किया गया है। भूकम्पसे सम्बन्धित वैदिक #ज्योतिषीय सूत्र एवं सिद्धान्त वर्तमान वैज्ञानिक शोधोंमें पूर्णरूपेण प्रतिष्ठित हुए हैं। हालहीमें किये गये एक विस्तृत वैज्ञानिक शोधमें मद्रास विश्वविद्यालयके भूगर्भशास्त्रियोंने पाया है...